आखिर विवि ने भी माना वाह्य परीक्षकों की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी, आदेश पर लगाई कुलसचिव ने रोक

अवधेश प्रताप सिंह विवि प्रबंधन का बड़ा कारनामा सामने आया था। बीएड की प्रायोगिक परीक्षा में वाह्य परीक्षक के रूप में अपात्रों को नियुक्त कर दिया गया था। बीएड प्रैक्टिकल परीक्षा अपात्रों को तैनात कर दिया गया था। इतना ही नहीं पूर्व कुलपति और परीक्षा नियंत्रकों की भी ड्यूटी लगाई थी। मामला उजागर होने के बाद विवि ने प्रायोगिक परीक्षा में नियुक्त प्रायोगिक वाह्य परीक्षक का नियुक्ति पत्र आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है।

आखिर विवि ने भी माना वाह्य परीक्षकों की नियुक्ति में हुई गड़बड़ी, आदेश पर लगाई कुलसचिव ने रोक
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अपात्रों को बीएड की प्रायोगिक परीक्षा के लिए बना दिया था वाह्य परीक्षक
मामला उजागर होने के बाद विवि ने लगाई रोक
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा चालू सत्र की बीएड, एमएड की मुख्य परीक्षाएं शीघ्र कराई जायेंगी। इस क्रम में विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोगिक परीक्षा हेतु बाह्य परीक्षक तैनात किए गए। इन बाह्य परीक्षकों की तैनाती में मनमानी के आरोप लगे। मामले को लेकर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध निजी बीएड महाविद्यालयों के संघ द्वारा  राज्यपाल को शिकायत भेजने की बात कही जा रही है। संघ द्वारा आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय ने मार्च 2025 की प्रायोगिक परीक्षा में यूटीडी के ही अधिकांश शिक्षकों को तैनात कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने मनोविज्ञान जैसे विषयों की प्रायोगिक परीक्षा में रसायनशास्त्र, भौतिकी के शिक्षकों को तैनात कर दिया है। निजी बीएड कालेज प्राध्यापक संघ ने विश्वविद्यालय की इस कार्यप्रणाली को लेकर विरोध जताया है। संघ का कहना है कि विश्वविद्यालय ने नियम विरुद्ध तरीके से अन्य विषयों के जिन प्राध्यापकों को बी.एड परीक्षाओं हेतु बाहय परीक्षक बनाया है, वह इसकी पात्रता नहीं रखते। बताया गया कि बी.एड. परीक्षाओं हेतु एम.एड एवं शिक्षा में पीएचडी या बी.एड. कक्षाओं के अध्यापन का तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले प्राध्यापक ही बी.एड प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए परीक्षक हो सकते हैं किंतु विश्वविद्यालय इस नियम का पालन नहीं कर रहा। मामला उजागर होने के बाद अवधेश प्रताप सिंह विवि के कुलसवि ने आदेश जारी कर वाह्य परीक्षक का नियुक्ति आदेश को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया है। इस कारगुजारी को विंध्य बुलेटिन ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद ही विवि ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बीएड प्रथम , द्वितीय वर्ष एवं एमएड प्रथम, द्वितीय वष्र परीक्षा 2025 की प्रायोगिक परीक्षा पत्र क्रमांक गोपनीय/ 2025/300 दिनांक 26 मार्च 2025 को जारी प्रायोगिक परीक्षा में निुयक्त प्रायोगिक वाह्य परीक्षक का नियुक्ति पत्र आगामी आदेश तक स्थगित करने का आदेश जारी किया गया है।
इन सब की लगाई गई है वाह्य परीक्षक के तौर पर ड्यूटी
बीएड प्रायोगिक परीक्षा के लिए पूर्व कुलपति प्रो रहस्यमणि मिश्रा और वर्तमान परीक्षा नियंत्रक डॉ राजकुमार सोनी को भी बीएड प्रायेागिक परीक्षा के लिए परीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा पर्यावरण जीव विज्ञान के प्राध्यापक डॉ अतुल तिवारी, भौतिक शास् के डॉ सीएम तिवारी, रसायन शास्त्र के डॉ सीएम तिवारी, डॉ सुनील पाण्डेय, अंग्रेजी की डॉ मृणाल श्रीवास्तव की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें से किसी के पास भी ना तो एमएड की डिग्री हैं और न ही बीएड कक्षाओं को पढ़ाने का अनुभव ही था। आरोप है कि प्राध्यापकों की पत्नियों को भी उपकृत किया गया । सर्वाधिक प्रैक्टिकल दो प्रोफेसरों और उनकी पत्नियों के नाम आवंटित किया गया था।