10 करोड़ के बदले जेल में 10 साल काटने की लगी बाजी

10 करोड़ के बदले 10 साल जेल में काटने की बाजी लगी। अमीर व्यक्ति ने वकील के सामने यह बाजी रखी। वकील ने स्वीकार किया और जेल में 10 साल बिताए और अंत में रुपए लिए बिना ही अपनी जान गवां दी। अंतिम दिन वकील ने एक पत्र भी छोड़ा। इसमें उसने जीवन का सार और जेल में बिताए 10 साल का अनुभव को छोड़ जाता है। इस पूरे नाटक को मंच पर कलाकारों ने सजीव प्रस्तुत किया। इस देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।

10 करोड़ के बदले जेल में 10 साल काटने की लगी बाजी
तीन दिवसीय रघुनंदन नाट्य समारोह में बाज़ी का हुआ मंचन

कृष्णा राज कपूर आडिटोरिय में तीन दिवसीय रघुनंदन नाट्य समारोह के पहले दिन हुआ मंचन
रीवा। रघुनंदन नाट्य समारोह की शुरुआत बैकस्टेज, प्रयागराज की ओर से प्रस्तुत सशक्त नाट्य प्रस्तुति बाज़ी से हुई। रंग उत्सव नाट्य समिति की ओर से कृष्णा राज कपूर प्रेक्षागृह में आयोजित तीन दिवसीय रघुनंदन नाट्य समारोह में बाज़ी की दिलचस्प रंगभाषा प्रयोग को दर्शकों ने खूब प्रशंसा की। इस नाटक में निर्देशन देश के विख्यात रंगकर्मी प्रवीण शेखर का था।
 यह प्रस्तुति एंटोन चेखव की 1889 में लिखी कहानी द बेट पर आधारित है जिसका नाट्य रूपांतरण अविनाश चंद्र मिश्र ने किया है। यह नाट्य प्रयोग मृत्युदंड और आजन्म कारावास के बीच दिलचस्प कथा विन्यास, नैरेटिव व बहस के साथ आगे बढ़ता है और जीवन के अर्थ की बात करते पूरा होता है। इसमें कथा और प्रयोग की संवेदना में मानवीयता का तत्व इतना गहरा है कि बहुत त्रासद स्थितियों में भी सूरज की रोशनी और सुंदरता के शाश्वत गुण को देखा गया है। इसमें अति सूक्ष्म मानवीय संवेदनाओं, जीवन की छोटी-छोटी बातों, निर्मम सच्चाई, जीवन में आस्था और वेदना का सहज चित्रण किया गया है।
बाज़ी जीवन की प्रकृति और मूल्य के बारे में एक शर्त है। अमीर गोयल मानते हैं कि मृत्युदंड आजीवन कारावास से अधिक मानवीय और नैतिक है। इसके विपरीत युवा वकील श्री सक्सेना का तर्क है कि बिल्कुल नहीं से बेहतर है जीवित रहना, किसी भी तरह जीना अपने आप में मरने से बेहतर है। दोनों तमाम तर्कों के बाद सहमत होते हैं कि अगर वकील दस साल के लिए कारावास सहन कर ले तो अमीर गोयल उसे एक बड़ी राशि देगा, यही वह दांव है। हालांकि, तकनीकी रूप से गोयल की जीत होती है लेकिन नैतिक जीत युवा वकील की होती है। वह जीवन का अर्थ, स्वर्ग, नर्क से जुड़े तमाम सवाल छोड़ जाता है। अपने कारावास की अंतिम रात को लिखे गए पत्र में, वकील उन सभी अनुभवों और ज्ञान को प्रकट करता है जो उसने पिछले दस वर्षों के दौरान अपने पढऩे के माध्यम से प्राप्त किए हैं और फिर मृत्यु के आगे इसे बेकार, क्षणभंगुर, भ्रामक घोषित करता है। अपने इसी विश्वास को ज़ाहिर करने के लिए, वकील शर्त के अपने दस करोड़ रुपये त्याग देता है और रिहा होने से कुछ मिनट पहले चला जाता है। बाज़ी का अंत लोगों को सोचने के लिए छोड़ देता है कि जीवन का अर्थ क्या है? क्या जीवन का कोई अर्थ है? क्या स्वर्ग का कोई अर्थ है।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
कथा और नाटक की बुनावट को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत नाटक में सतीश तिवारी (अमीर गोयल), अमर सिंह (युवा वकील), प्रत्यूष वर्सने (पत्रकार तनेजा), स्मृति श्रीवास्तव (श्रीमती गोयल) ने अपनी चरित्रों को बखूबी जिया। रामसेवक की भूमिका में मोहित कुमार ने भी प्रभावित किया। प्रशंसनीय प्रकाश योजना टोनी सिंह, प्रस्तुति से एकरूप होता संगीत अमर सिंह का, वेशभूषा परिकल्पना स्मृति श्रीवास्तव और मंच निर्माण सिद्धार्थ पाल ने किया।
आज इनका मंचन होगा
संस्था के संरक्षक बताते हैं कि द्वितीय दिवस 09 सितंबर को नाटक - पार्क का मंचन होना है, इसके लेखक - मानव कौल तथा निर्देशक- अंकित मिश्रा हैं यह प्रस्तुति रंग उत्सव नाट्य समिति रीवा की होनी है । अंतिम दिवस 10 सितंबर को नाटक- नकबेसर का मंचन होना है इसके लेखक - फणीश्वर नाथ रेणु तथा निर्देशक - आनंद मिश्रा हैं यह प्रस्तुति- सघन सोसाइटी फ़ॉर कल्चरल एंड वेलफेयर , भोपाल की होगी । रंग उत्सव नाट्य समिति के सचिव ने सभी कला प्रेमी दर्शकों से अनुरोध किया है कि रघुनंदन महोत्सव 2023 जिसका आयोजन स्थानीय कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में 8,9,10 सितम्बर को हो रहा है ।