करोड़ों का बजट डूब गया, कोषालय में बिल ही नहीं लगा, रीवा के हेल्थ को लगा झटका
वित्त विभाग ने विभागों को मार्च महीने के अंतिम दिन झटका दिया है। करोड़ों रुपए का बजट लैप्स हो गया। वित्त विभाग ने बजट आहरण की अनुमति पर ही रोक लगा दी। विभाग मद में राशि देखकर बिल लगाते रहे लेकिन कोषालय ने स्वीकार नहीं किया। करोड़ों रुपए आंखों के सामने ही लैप्स हो गए। सबसे बड़ा झटका रीवा और विंध्य के स्वास्थ्य सेवाओं को लगा है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग का बजट भी लैप्स हुआ है।

मेडिकल कॉलेज का करोड़ों रुपए लैप्स हुआ
कर्मचारियों का वेतन, साफ सफाई का भुगतान की राशि का नहीं हो पाएगा भुगतान
रीवा। कर्ज में डूबी सरकार ने विभागों के आहरण संवितरण पर वित्तीय वर्ष खत्म होने के अंतिम दिन ऐसी रोक लगाई कि विभागों के होश उड़ गए। अंतिम समय में बजट को आहरण करने के लिए विभागों के बिल ही कोषालय में नहीं लगे।करोउ़ों के बजट लैप्स हो गए। मेडिकल कॉलेज सहित अन्य विभाग हाथ मलते रहे गए। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को बड़ा झटका लगा है। बिल पास न होने से कर्मचारियों के वेतन पर भी संकट मंडरा सकता है।
ज्ञात हो कि मप्र सरकार ने करोड़ों रुपए का बजट विभागों को आवंटित किए थे। करोड़ों रुपए के बजट समय पर विभागों ने आहरित नहीं किए। जब बजट लैप्स होने का समय आया तो आपाधापी मच गई। विभागों से कोषायल में आनलाइन बिल लगाना शुरू किया गया। इस पर अंतिम समय में वित्त विभाग ने एक आदेश जारी कर सभी विभागों को करारा झटका दिया है। करोड़ों रुपए का बजट मदों में था लेकिन विभाग आहरित नहीं कर पाए। संचालक बजट ने अंतिम दिन ही आदेश जारी कर सभी तरह के आहरण पर रोक लगा दिए। इससे अंतिम दिन मदों में पड़े बजट को आहरण की कोशिश करने वाले विभागों को झटका लग गया। करोड़ों रुपए का बजट लैप्स हो गया। इसमें सबसे बड़ा नुकसान चिकित्सा शिक्षा विभाग को उठाना पड़ा। 25 मार्च से ही कोषालय में लगाए जा रहे बिल वापस किए जा रहे थे। अंतिम दिन जब आईएफएमआईएस में देयकों को प्रस्तुत किया गया तो स्वीकार ही नहीं हुआ। अब बजट लैप्स होने से कई भुगतान अटक जाएंगे। इससे अस्पताल और कॉलेजों के काम काज पर भी असर पडऩा तय माना जा रहा है।
वित्त विभाग ने यह जारी किया अंतिम दिन आदेश
संचालक बजट ने अंतिम दिन यानि 31 मार्च को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में स्पष्ट कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 की समाप्ति को दृष्टिगत रखते हुए आईएफएमआईएस पर देयकों के आहरण केवल वित्त विभाग और आयुक्त कोष एवं लेखा मप्र की विशेष अनुमति से ही किए जाएंगे। इस आदेश को अंतिम दिन ही जारी किया गया। इससे आहरण एवं संवितरण अधिकारियेां को गहरा झटका लगा है।
मेडिकल कॉलेज, कृषि, पीडब्लूडी सहित अन्य को लगा झटका
कई विभाग मार्च महीने में ही बजट का उपयोग करते हैं। मार्च महीने के खत्म होने के पहले बजट को लैप्स होने से बचाने के लिए ताबड़तोड़ बिल लगाए जाते हैं। हालांकि इस मर्तबा 25 मार्च से ही कोषालयों में बिलों के आहरण पर रोक लगने लगी थी। अंतिम दिन तक यही समस्या बनी रही। 31 मार्च को आदेश से परेशानियां और बढ़ गई। मेडिकल कॉलेज से भी करोड़ों रुपए के बिल लगाए गए लेकिन स्वीकार नहीं हुए। साफ सफाई, सुरक्षा सहित अन्य मदों में करोड़ों रुपए का बजट था जो पास नहीं हो पाया। अब कर्मचारियों के भुगतान पर भी संकट मंडराएगा। इसके अलावा कृषि विभाग, पीडबलूडी, पीआईयू, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं, लोक स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग, उद्यान विभाग, उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों के बजट लैप्स हो गए। आहरण संवितरण अधिकारियों की लापरवाही से रीवा के विकास और सुविधाओं को झटका लगा है।