प्रभार की बैशाखी पर विभाग, घिसटते हुए चल रहे काम, एक दर्जन से अधिक विभाग प्रभारी के भरोसे चल रहे
सरकारी विभागों के पास रेग्युलर अधिकारी ही नहीं है। योजनाओं और विभागों की रीड़ कहे जाने वाले जिला पंचायत सीईओ तक की कुर्सी प्रभारी के भरोसे चल रही है। वनमंडलाधिकारी और सीसीएफ वन अनुसंधान का पद महीनों से खाली है। पड़ोसी जिलों के अधिकारी रीवा वन विभाग चल रहा रहे हैं। शिक्षा विभाग भी प्रभार पर चल रहा है। एक दर्जन से अधिक ऐसे विभाग हैं जो भगवान भरोसे हैं। इन विभागों की योजनाएं भी ठप पड़ गई हैं।

एक दर्जन से अधिक विभागों के पास रेग्युलर अधिकारी नहीं
जिला पंचायत सीईओ तक नहीं हैं, अधिकारी के लिए धरना देना पड़ा
रीवा। सरकारी एक के बाद एक योजना लेकर आ रही है। लोगों को अधिक से अधिक सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश की जा रही है। शिविर लगाए जा रहे हैं। लेकिन इन योजनाओं को लीड करने वाले विभागीय अधिकारी ही नहीं है। प्रभारी अधिकारी सरकारी की योजनाओं को खींच रहे हैं। अब ऐसे में जब विभाग ही नहीं सम्हल रहा तो योजनाओं के इम्प्लीमेंटेशन का अंदाजा भी सहज ही लगाया जा सकता है। हालात ऐसे हैं कि अब जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों की पदस्थापना के लिए धरना देना पड़ रहा है। फिर भी कुछ नहीं हुआ। रीवा के एक दर्जन से अधिक ऐसे विभाग हैं, जहां महीनों से रेग्युलर अधिकारियों की पदस्थापना नहीं है। जिला अधिकारी तो ठीक है संभागीय अधिकारी तक नहीं है। अब ऐसे में बिना अधिकारी वाले कार्यालयों की कार्यप्रणाली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिला पंचायत सदस्य धरने पर बैठ चुके
हद तो यह है कि जिला पंचायत सीईओ जैसे पद पर अभी तक किसी अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई। जिस विभाग की योजनाओं हर गांव और घर से सीधे जुड़ी हुई हैं। उसी विभाग को नजर अंदाज कर दिया गया है। सीईओ की कुर्सी प्रभार में चल रही है। एडीएम को प्रभार दिया गया है। इससे राजस्व और जिला पंचायत दोनों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सीईओ की खाली कुर्सी को लेकर जिला पंचायत सदस्य धरने तक पर बैठ चुके हैं। इसके बाद भी अभी तक पदस्थापना नहीं हो पाई है।
दो जिलों पर पड़ रहा है असर
वन विभाग का डीएफओ जैसा पद खाली है। महीनों से डीएफओ की पदस्थापना नहीं हुई है। लगातार रीवा में वन अपराध के खुलासे होते रहे हैं। ऐसे में अधिकारी की पदस्थापना नहीं किए जाने से वन माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं। डीएफओ रीवा के पास रीवा और मऊगंज दोनों जिलों की कमान थी। अब दोनों ही जिले बिना अधिकारी के चल रहे हैं। एसडीओ तक का पद खाली है। इसी तरह सीसीएफ वन अनुसंधान का पद भी खाली है। इसके कारण रीवा और शहडोल संभाग के 7 जिले प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा विभाग की भी हो रही है दुर्गति
अन्य विभागों की तरह की शिक्षा विभाग की भी दुर्गति हो गई। स्कूल शिक्षा विभाग को स्कूलों में पदस्थ अतिशेष शिक्षकों की चिंता तो जरूर सताई लेकिन डीईओ और डीपीसी के रिक्त पदों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। रीवा जिला में जिला शिक्षा अधिकारी और जिला समन्वयक अधिकारी जिला शिक्षा केन्द्र का पद कई महीनों से खाली है। अधिकारियों की कमी पूरे सिस्टम को धरासाई कर रही है। शिक्षा का स्तर भी लगातार नीचे गिरता जा रहा है।
इन विभागों के पास नहीं हैं रेग्युलर अधिकारी
- जिला पंचायत
- जिला शिक्षा केन्द्र
- अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा
- प्राचार्य, जीडीसी
- प्राचार्य, न्यू साइंस कॉलेज
- जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय
- डीएफओ, वन मंडल कार्यालय
- एसडीओ वन विभाग
- सीसीएफ वन अनुसंधान
- खाद्य आपूॢत विभाग
- सामाजिक न्याय विभाग
- जिला रोजगार कार्यालय
- जेडी, कृषि विभाग
- सीएमएचओ
- उद्यान विभाग