आदिम जाति कल्याण विभाग में फिर हुआ फर्जीवाड़ा, लिपिक ने अधीक्षकों को धमकाया और रीवा के इन फर्मों को कराया भुगतान
आदिम जाति कल्याण विभाग फिर सुखियों में है। हास्टल के मरम्मत कार्यों को लेकर लाखों रुपए की राशि अधीक्षकों को जारी की गई। अधीक्षकों ने हास्टल में काम तो कराया लेकिन फर्मों ने कार्य पूरा नहीं किया। इसके बाद भी स्टोर इंचार्ज और जिला संयोजक ने अधीक्षकों पर दबाव बनाकर चेक से पूरा भुगतान करा दिया। शिकायत के बाद जब कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू हुई तो पूरा मामला उजागर हो गया। टेंडर प्रक्रिया और शर्तों में भी कोताही बरती गई। जांच पूरी होने के बाद जांच प्रतिवेदन कलेक्टर रीवा को सौंप दिया गया है।

आदिम जाति कल्याण विभाग के हास्टल में किए गए कार्यों में अनियमितता को लेकर की गई थी शिकायत
जांच में सामने आया सच, कलेक्टर को जांच अधिकारियों ने सौंपा प्रतिवेदन
रीवा। आदिम जाति कल्याण विभाग में छात्रावासों के निर्माण, विद्युत फिटिंग के लिए राशि जारी की गई थी। टेंडर प्रक्रिया में कलेक्टर के निर्देशों और शासन के आदेशों का पालन नहीं किया गया। आदेश के विपरीत तत्कालीन जिला संयोजक एवं शाखा प्रभारी विकास तिवारी ने काम किया। इसके संबंध में समाजसेवी कमल सिंह ने शिकायत कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। इस पर अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी और आईएएस प्रपंच आर ने शिकायत की जांच की। शिकायतकर्ता ने जो शिकायत की थी वह जांच में सही पाई गई। अपर कलेक्टर ने 18 मार्च 2025 को रीवा संभाग रीवा को तत्कालीन जिला संयोजक एवं शाखा प्रभारी विकास तिवारी को आरोपित मानते हुए जांच प्रस्तुति की। जांच प्रतिवेदन 18 मार्च को कलेक्टर रीवा संभाग रीवा को जांच प्रतिवेदन सौंप दिया है।
पीडब्लूडी के इंजीनियर की निगरानी में कराना था टेंडर लेकिन अनदेखी की गई
मप्र शासन वित्त विभाग के आदेशानुसार भवन प्रभारी 5 लाख रुपए तक के कार्यों को गठित समित की अनुशंसा पर नियमानुसर सीमित निविदा प्राप्त कर न्यूनतम दर प्रस्तुत करने वाली एजेंसी का चयवन करते हुए संपादित करा सकेंगे। कार्यालय कलेक्टर अनुसूचित जाति जनजाति कार्यालय रीवा के आदेश क्रमांक 8015 दिनांक 7 मार्च 2022 के अनुसर प्रशासकीय स्वीकृति उपरांत कुल 14 अधीक्षक , प्रभवन प्रभारी के खाते में कोषालय सरवर के माध्यम से ट्रेजरी बिल रेफरेल नंबर 200015068694 दिनांक 14 मार्च 2023 को 68 लाख 34 हजार 502 रुपए का भुगतान अधीक्षकों, भवन प्रभारी के खातों में ई भुगतान किया गया है। किंतु भवन प्रभारी, अधीक्षकों द्वारा स्वीकृत आदेश में अंकित शर्तों का पालन न करते हुए कार्य कराए गए हैं। जबकि तत्कालीन कलेक्टर ने नोटशीट क्रमांक 7 पर लेख किया है कि ई टेंडर की कार्यवाही कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग ई एंड एम की निगरानी में करें। नोटशीट क्रमांक 8 पर 10 छात्रावासों के मरम्मत कार्य के लिए 41 लाख 33 हजार 540 रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति तत्कालीन कलेक्टर ने देते हुए लेख किया था कि कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रीवा की निगरानी में टेंडर की प्रक्रिया करें लेकिन टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
जीएसटी की राशि भी शासन के खाते में जमा नहीं की गई
जिला संयोजक अनुसूचित जाति जनजाति कार्य विभाग ने अलग अलग आदेशों के माध्यम से विद्युत फिटिंग का कार्य करा कर राशि का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से 2 दिन के अंदर भुगतान करने का आदेश प्रसारित किया गया था। साथ ही जीएसटी आईटी टीडीएस का दो दो प्रतिशत राशि चालान के माध्यम से जमा करने के निर्देश दिए गए थे किंतु छात्रावास अधीक्षकों ने छात्रावास में विद्युत फिटिंग कराए हाने के उपरांत राशि का प्रभारी अधीक्षकों ने ना तो आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया और न ही जीएसटी की राशि संबंधित मदों में जमा कराई। जिला संयोजक अनुसूचित जाति वं जनजाति कर्य विभाग रीवा द्वारा 14 छात्रावासों में विद्युत फिटिंग का प्राक्कलन राशि 57 लाख 92 रुपए और जीएसटी 10 लाख 42 हजार 502 रुपए कुल 68 लाख 34 हजार 502 रुपए का भुगतान अधीक्षकों के खाते में किया गया। इस राशि में जीएसटी 10 लाख 42 हजार 502 रुपए शासन के खजाने में जमा नहीं कराया गया। अधीक्षकों के खाते में ही राशि जमा है। यह गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
कोटेशन में दर का जिक्र नहीं था फिर भी काम दे दिए
जांच प्रतिवेदन में लेख किया गया है कि सभी अधीक्षक, भवन प्रभारी की पालक शिक्षक संघ के कार्यवाही पुस्तिका का अवलोकन करने पर पाया गया कि 7 अधीक्षकों ने कार्य कराया। सातों के द्वारा तीन फार्मों से कोटेशन प्राप्त किए गए जो नियमानुसार नहीं मिले। कोटेशन में दर का उल्लेख नहीं था। 14 अधीक्षकों में से 5 अधीक्षकों द्वारा ना तो कार्य कराया गया और न ही कोई भुगतान किया गया। उनके खाते में राशि उपलब्ध है तथा 7 अधीक्षकों ने कार्य कराया लेकिन भुगतान 5 अधीक्षकों ने संविदाकारों को किया। शेष 2 जड़कुड़, बिछरहटा के अभिलेख उपलब्ध नहीं हुए। भुगतान करने वाले अधीक्षकों के द्वारा नियमानुसार आरटीजीएस ऑनलाइन न करते हुए चेक के माध्यम से संविदाकारों को भुगतान किया गया जो वित्तीय औचित्य के मानक सिंद्धांतों के विपरीत है।
लिपिक ने धमकाया कर चेक से कराया भुगतान
गुढ़ , चरैया, बालक पिपराही, खुटहा, हर्रई प्रताप सिंह के अधीक्षकों के कथन में उल्लेख किया गया है कि विकास तिवारी, सहायक ग्रेड 3 निर्माण शााा आदिम जाति कल्याण विभाग रीवा के द्वारा सभी को कार्यालय बुलाकर चेक के माध्यम से भुगतान कराया गया। जांच में पाया गया कि जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग कार्यालय के द्वारा कार्य की प्रक्रिया व निविदा संबध्ंाी कार्यवाही नियमानुसार पूर्ण न करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से विकास तिवारी सहायक वर्ग 3 ने छात्रावास अधीक्षकों के ऊपर दबाव बनाकर नियम के विपरीत नेशनल ट्रेडर्स अमहिया, शिवम गुप्ता उपरहटी रीवा को भुगतान कराया गया। कार्य को पूरा कराने की जिम्मेदारी शाखा लिपिक विकास तिवारी सहायक वर्ग 3 प्रभारी स्टोर और जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विााग रीवा की थी लेकिन दोनों ने ही लापरवाही बरती।