रीवा में इस बीमारी के बढ़ रहे मरीज लेकिन डॉक्टर सिर्फ एक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में में 10 पद हैं खाली

रीवा को एक और नेफ्रोलॉजिस्ट की जरूरत है। एक नेफ्रोलॉजिस्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पदस्थ तो हैं लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के हिसाब से नाकाफी हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। अभी भी किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बाहर जाना पड़ रहा है। सुपर स्पेशलिटी में अभी भी 10 पद खाली हैं। इन्हें भरने की जरूरत है।

रीवा में इस बीमारी के बढ़ रहे मरीज लेकिन डॉक्टर सिर्फ एक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में में 10 पद हैं खाली
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रीवा के मरीजों को नहीं मिल रही पर्याप्त राहत, बाहर जाने को हैं मजबूर
ओपीडी की संख्या तेजी से बढ़ रही, एक से दो नहीं हो पाए नेफ्रोलॉजिस्ट
रीवा। ज्ञात हो कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की शुरुआत कुछ खास बीमारियों से लोगों को राहत दिलाने के लिए की गई। यहां करीब 100 पद डॉक्टरों के स्वीकृत किए गए। सुपर स्पेशलिटी में अभी भी कई कई पद खाली हैं। कई विभागों को प्रबंधन शुरू करना चाहता है लेकिन डॉक्टर नहीं मिल रहे। कुछ विभाग चल रहे हैं लेकिन पर्याप्त डॉक्टर नहीं है। ऐसे में डॉक्टर भी इसका फायदा उठाते हैं। अपनी मनमर्जी से विभाग चला रहे हैं। इनमें से एक विभाग नेफ्रोलॉजी भी है। यहां सिर्फ एक ही डॉक्टर हैं। यही सारे रिक्त पदों की भरपाई कर रहे हैं। डॉ रोहन द्विवेदी के आने के बाद कम से कम रीवा के लोगों को राहत तो मिली है लेकिन अभी पूरी तरह से नहीं। किडनी की बीमारियों से जूझने वालों को डॉक्टरों की कमी के कारण पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। अभी बाहर जाने का सिलसिला थमा नहीं है। सुपर स्पेशलिटी में डॉक्टर कम है और बेड भी कम है। यहां भर्ती होने के लिए भी लंबी मशक्कत करनी पड़ती है। लोग नेफ्रोलॉजी विभाग का और विस्तार चाह रहे हैं। प्रशासन से इस विभाग के विस्तार और नए डॉक्टरों की पदस्थापना के प्रयास तेज करने की बात कह रहे हैं।
रीवा में तेजी से बढ़ रहे है किडनी के मरीज
अब तक रीवा कैंसर रोगियों के लिए ही जाना जाता था। अब किडनी के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 18 मशीनें लगी होने के बाद भी यहां मरीजों को नंबर लगाना पड़ता है। 24 घंटे डायलिसिस की सेवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा सुपर स्पेशियलिटी में ही किडनी ट्रांसप्लांट की भी शुरुआत हो गई है। दो मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट भी किया जा चुका है। नया भवन भी बनना शुरू हो गया है। इससे रीवा में किडनी मरीजों की स्थिति का अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं।
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग में तीन प्रोफेसर, तीन एसोसिएट प्रोफेसर और 5 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद स्वीकृत हैं। इसमें से सिर्फ एक ही पद भरा हुआ है। डॉ रोहन द्विवेदी ही कई सालों से यहां सेवाएं दे रहे हैं। इस एक संख्या को प्रबंधन और शासन आगे नहीं बढ़ा पाया। यही वजह है कि विभाग और चिकित्सक पर मरीजों का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। नेफ्रोलॉजिस्ट के मामले में रीवा की हालत खराब ही है। इसी का नुकसान रीवा वाले उठा रहे हंै। अभी भी बाहर इलाज के लिए जा रहे हैं।
हर महीने 500 तक रहती है ओपीडी
नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी धीरे धीरे बढ़ रही है। यहां हर महीने नेफ्रोलॉजी की ओपीडी 400 से 500 के करीब रहती है। अधिकांश लोग हालांकि बाहर ही इलाज कराने जाते हैं लेकिन जो असक्षम हैं। आर्थिक रूप से कमजोर हैं। वह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की राह पकड़ते हैं। डॉक्टर और स्टाफ की कमी के कारण कई बार मरीजों को लंबा इंतजार भी करना पड़ता है।
इस्तीफा भी दे चुके हैं डॉक्टर
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पदस्थ नेफ्रोलॉजिस्ट पद से इस्तीफा तक दे चुके हैं। इसके बाद डिप्टी सीएम की पहल पर ही वह दोबारा सुपर स्पेशलिटी में काम करने को तैयार हुए थे। सिंगल नेफ्रोलॉजिस्ट होने के कारण उनकी हर मांगों को प्रबंधन से लेकर प्रशासन और शासन तक मानने को तैयार रहता है।
वर्ष 2024 में पहुंचे नेफ्रोलॉजी विभाग में मरीजों की संख्या
अप्रैल          432
मई             529
जून            157
जुलाई        565
अगस्त        439
सितंबर        530
अक्टूबर        480
नवंबर         452
दिसंबर         516
फरवरी 2025    402