सालों से लूट रहा था रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर, अब बंद होगी दुकान, अनुबंध होने वाला है समाप्त!
एमआरआई और सीटी स्केन के नाम पर मरीजों को लूटने वाले रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर के अच्छे दिन लदने वाले हैं। अनुबंध पर ग्रहण लगने वाला है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमआरआई सेंटर की शुरुआत के बाद इसे अपना बोरिया बिस्टर समेटना पड़ेगा। सामान्य प्रशासन की बैठक में इसी शर्त पर अनुबंध को रिन्यू किया गया था। चंद दिनों में ही रीवा डायग्नोस्टिक में ताला लगना तय माना जा रहा है।

10 फरवरी 2024 के सामान्य प्रशासन की बैठक में एक शर्त पर दी गई थी अनुबंध के रिन्युअल की अनुमति
परिसर में दोनों ही सेवाएं शुरू होने पर अनुबंध हो जाएगा स्वमेव समाप्त
इस सेंटर में कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए अलग रेट है और मरीजों से दोगुना वसूला जाता है
रीवा। चंद दिनों में आउटसोर्स कंपनी की मनमानी बंद हो जाएगी। एमआरआई और सीटी स्केन के नाम पर लूट खसोट करने वाली रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर को बोरिया बिस्तर समेटना पड़ेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमआरआई और संजय गांधी अस्पताल में सीटी स्केन सेंटर के शुरू होते ही अनुबंध के अनुसार आउटसोर्स सेंटर को हटना होगा। इससे मरीजों को राहत मिलेगी।
ज्ञात हो कि संजय गांधी अस्पताल में मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए प्राइवेट कंपनी को अनुबंध के तहत एमआरआई और सीटी स्केन मशीन स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। मामूली शुल्क पर संजय गांधी अस्पताल में ही बड़ी जगह भी उपलब्ध कराई गई है। इसका किराया बढ़ाने की जगह कम भी कर दिया गया। वर्ष 2024 में रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर का अनुबंध खत्म हो गया था। अनुबंध बढ़ाया नहीं जा रहा था। बाद में लाख कोशिशों के बाद सामान्य प्रशासन की बैठक में डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला की अध्यक्षता में एक शर्त पर अनुबंध को बढ़ाया गया। अब यह अनुबंध भी खत्म होने वाला है। बैठक में शर्त रखी गई थी कि जब तक संजय गांधी अस्पताल या फिर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमआरआई, सीटी स्केन की सुविधा शुरू नहीं हो जाती। तब तक रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर अपनी सेवाएं दे सकेगा। अस्पताल परिसर में मशीन के स्थापित होने के बाद इनका अनुबंध स्वमेव समाप्त माना जाएगा। ऐसे में चंद दिनों बाद रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर को अपना बोरिया बिस्तर समेटना पड़ेगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एमआरआई मशीन के इंस्टालेशन का काम शुरू हो गया है। पार्ट भी पहुंच गए हैं। एक महीने के अंदर एमआरआई सेंटर की शुरुआत हो जाएगी। वहीं संजय गांधी अस्पताल में भी सीटी स्केन मशीन लगाई जा रही है। दोनों ही मशीनों के इंस्टालेशन के बाद अनुबंध खत्म हो जाएगा।
बाक्स.....
मेडिकल कॉलेज के स्टाफ से भी वसूल चुका है ज्यादा राशि
बड़ी बिड़ंबना यह है कि रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच के दो रेट हैं। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों के लिए अलग रेट चलता है और संजय गांधी अस्पताल में काम करने वाले स्टाफ के लिए अलग रेट निर्धारित हैं। स्टाफ को मरीज के लिए तय दाम से आधे में जांच की जाती है। इसके बाद भी रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के स्टाफ को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ा। कई स्टाफ की जांच के बाद दोगुना यानि फुल रेट वसूल चुका है। इसकी शिकायत भी हुई थी। मामले की जांच की भी योजना तैयार हुई थी। हालांकि रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर को बचाने के लिए मामले में लीपापोती कर दी गई। जिन स्टाफ से अधिक राशि की वसूली की गई थी। उनसे कंपनी ने राजीनामा कर लिया और आपत्ति, शिकायत के बाद अतिरिक्त वसूली गई राशि को वापस लौटा दिया गया था। अब इस सेंटर की लूट का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बाक्स...
करोड़ों रुपए आयुष्मान के नाम पर होता है भुगतान
रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर संजय गांधी अस्पताल परिसर से हटना नहीं चाहती। यही वजह है कि जब कमिश्नर रीवा संभाग रीवा ने अनुबंध को रिन्यू करने से इंकार कर दिया था तो कंपनी ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। इसके पीछे मुख्य वजह आयुष्मान से मिलने वाली करोड़ों रुपए की राशि का भुगतान हैं। रीवा डायग्नोस्टिक सेंटर में सबसे अधिक आयुष्मान कार्डधारियो की जांच होती है। बाद में इसका भुगतान कंपनी को एक साथ किया जाता है। यह राशि करोड़ों में होती है। इस राशि से कई मशीनें अस्पताल में इंस्टाल की जा सकती हैं। इसी राशि के चक्कर में कंपनी अस्पताल परिसर से हटना नहीं चाहती। इसके अलावा डॉक्टरों का कमीशन अलग से फिक्स है। बाहर से भी यहां जांच के लिए मरीज भेजे जाते हैं।