वन विभाग में नियम दरकिनार, एक ही कर्मचारी पर अधिकारी हुए मेहरबान पहले आया फिर वहीं बैठाया
वन विभाग में एक ही कर्मचारी को उपकृत करने का मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। व्यय शाखा में पदस्थ रहते एक कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगे तो अधिकारियों ने शाखा बदल दी। बाद में फिर से उसी शाखा में पदस्थ कर दिया गया। अधिकारियों की यह करतूत विधानसभा का मुद्दा बन गया है। सेमरिया विधायक ने ध्यानाकार्षण लगाया है।

वन विधानसभा में लगा ध्यानाकर्षण,विभाग के अधिकारियों की मंशा पर उठे सवाल
रीवा। विधानसभा में सेमरिया विधायक ने ध्यानाकर्षण लगाया है। ध्यानाकार्षण वन विभाग से जुड़ा हुआ है। शासन के निर्देशों से हटकर की गई पदस्थापना को निरस्त कर कार्यवाही किए जाने को लेकर ध्यानाकर्षण लगाया है। ध्यानाकर्षण में कहा गया है कि रीवा जिला के वन मंडल कार्यालय में व्यय शाखा में वर्ष 2022 से वर्ष 2024 के दौरान किन कर्मचारियों की पदस्थापना किन शर्तों पर की गई थी। पदस्थापना उपरांत इनके कार्य संतोषजनक न पाए जाने की शिकायत पर इनका अन्यत्र पदस्थ किए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। तब कब किनके आदेश द्वारा नरेन्द्र मिश्रा को व्यय सेक्शन में पदथ किया गया। शिकायत के कारण व्यय में अनियमितता को लेकर स्थापना शाखा में पदस्थ किया गया। इसके बाद लभगग 15-20 दिनों बाद पुन: क्या ऐसी आवश्यकता महसूस हुई कि श्री मिश्रा को सीसीएफ द्वारा पुन: व्यय शाखा में पदस्थ किया गया। इस तरह से वन मंडल कार्यालय रीवा व सीसीएफ कार्यालय में कितने कर्मचारियों, अधिकारियों के कार्य के लिए परिवर्तन किया गया। कार्य आवंटन कर पुन: उसी सीट व पद पर पदस्थापना किया गया। किसी कर्मचारी अधिकारी को एक बार उस सीट व पद से हटाए जाने के बाद पुन: उसी पद व सीट पर पदस्थ किया जाना क्या शासन के निर्देशों के अनुसार है। ध्यानाकर्षण में पूछा गया है कि इस तरह की पदस्थापना के लिए शासन के क्या निर्देश है। शासन के निर्देशों से हटकर एक ही सीट व पद पर कनिष्ठ अधिकारी उसी कार्यालय में पदस्थ हैं लेकिन उनको उनकी योग्यता अनुसार पदस्थापना पर कार्य नहीं लिया जा रहा है। इसके लिए वन मंडलाधिकारी व सीसीएफ कार्यालय के किन अधिकारियों को जिम्मेदार मानकर कार्यवाही के लिए निर्देशित किया जाएगा। सेमरिया विधायक का कहना है कि बार-बार पदस्थापना की कार्यवाही करना कनिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी को उसी योग्यतानुसार पद पर पदस्थ कर कार्य न लिए जाने से क्षेत्र, कर्मचारियों में भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है। इससे शासन की छवि धूमिल हो रही है।