दुकानदारों ने झोंली कलेक्टर की आंख में धूल, निजी प्रकाशक की पुस्तक लाए ही नहीं, एनसीआरटी की किताबें लेकर लौटे अभिभावक
दो दिन चले पुस्तक मेला में स्टॉल लगाने कलेक्टर की सख्ती पर दुकानदार पहुंच तो गए लेकिन यहां भी गेम खेल गए। निजी प्रकाशकों की पुस्तकें स्कूलों में लगनी है। वहीं पुस्तकें मेला में नहीं मिली। सिर्फ एनसीआरटी की किताबें ही छूट के साथ मिलीं। बिलाबांग स्कूल की पुस्तकें भी नहंी मिली। इसे लेकर भी शिकायत हुई। डे्रस और स्टेशनरी खरीदी में भी अभिभावकों को राहत मिली। कलेक्टर के प्रयास से हालांकि काफी हद तक अभिभावकों को महंगी किताबों से राहत मिली है। एक ही छत के नीचे सारी चीजें उपलब्ध हुईं। कई लोगों ने पुस्तक मेला की अवधि बढ़ाने की भी मांग शुरू कर दी है।
हेल्पडेस्क में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की शिकायत सबसे अधिक पहुंची
बिलाबांग में लगने वाली किताबें स्टॉल में नहीं थी, इसकी भी शिकायत हुई
रीवा। दो दिवसीय पुस्तक मेला में 10 फीसदी की छूट लेने लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। मेला में सभी तरह की किताबों मिलने का सपना दिखाया गया लेकिन निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें नहीं मिली। दुकानदारों ने चालाकी कर दी। हेल्पडेस्क में शिकायतों के पहुंचने का सिलसिला नहीं थमा। सबसे अधिक निजी प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं मिलने और सिंगल किताबों की शिकायत पहुंची। दो दिनों तक चले पुस्तक मेला का शनिवार को समापन हो गया। अब अगले साल फिर मेला लगेगा।
ज्ञात हो कि प्राइवेट स्कूलों की महंगी किताबों से अभिभावकों को राहत पहुंचाने कलेक्टर ने पुस्तक मेला का आयोजन कराया। पुस्तक मेला दो दिनों तक मानस भवन में आयोजित किया गया। शुक्रवार को शुरुआत हुई और शनिवार को समापन हो गया। पुस्तक मेला में करीब 32 डे्रस, स्टेशनरी और पुस्तक विक्रेताओं ने रजिस्टे्रशन के बाद दुकानें लगाईं। मेला में 10 फीसदी छूट देने का वायदा किया गया था। हालांकि वायदे के अनुसार 10 फीसदी छूट भी दी गई लेकिन जिसकी तलाश में अभिभावक मेला पहुंचे। उनमें अधिकांश किताबें नहीं मिली। सिर्फ एनसीआरटी की ही किताबें मिली और उन्हीं पर छूट दी गई। प्राइवेट स्कूलों ने जो महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें लागू की है। उन्हें मेला में बेचने के लिए लाया ही नहीं गया। इसी वजह से कई अभिभावक मेला से नाराज होकर लौटे। अब इन्हें फिर से दुकानों में ही जाना पड़ेगा।
ेमेला अवधि बढ़ाने की मांग
कलेक्टर के प्रयास से अभिभावक खुश नजर आए। भले ही किताबें न मिली हो लेकिन स्टेशनरी में उन्हें बंपर छूट मिली। कई स्टेशनरी दुकानदारों ने 30 से 40 फीसदी तक छूट दिए। इससे भी उन्हें राहत मिली। कई अभिभावक पुस्तक मेला में पहुंच नहीं पाए। उन्हें मेला खत्म होने का मलाल रहा। पुस्तक मेला की अवधि बढ़ाने की भी मांग की गई। हालांकि अगले साल प्रशासन मेला अवधि को और अधिक दिनों के लिए लगाने की कोशिश करेगा।
निजी प्रकाशकों की किताबें नहीं मिली
पुस्तक मेला में पुस्तक विक्रेताओं ने चालाकी दिखाई। निजी स्कूलों की किताबें मेला में बिक्री के लिए रखी ही नहीं गईं थी। सिर्फ एनसीआरटी की ही पुस्तकें रखी गईं। इसके कारण निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों को अधूरी पुस्तकें ही मिली। एनसीआरटी की बिताबों पर ही दुकानदारों ने छूट भी दी।
कई तरह की शिकायतें पहुंची
पुस्तक मेला में अभिभावकों की शिकायतों का निराकरण करने के लिए हेल्पडेस्क भी बनाया गया था। हेल्पडेस्क में कई तरह की शिकायतें अभिभावकों की पहुंची। सबसे अधिक शिकायतें पुस्तकों को लेकर ही की गईं। दुकानदार किताबों का बंडल बनाकर दे रहे थे। अभिभावक फुटकर किताबें मांगने पर अड़े थे। इसे लेकर शिकायत की गई। इसके अलावा निजी प्रकाशकों की कताबें नहीं थी। इसकी भी शिकायतें की गईं।