चुनावी फ्री स्कीम: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी, राजस्थान, केन्द्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

चुनावी घोषणाओं में फ्री स्कीम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। Supreme Court ने एक जनहित याचिका पर दो राज्यों MP, राजस्थान, केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस मामले में 4 सप्ताह में जवाब मांगा गया है।

चुनावी फ्री स्कीम: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी, राजस्थान, केन्द्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

NEW DELHI. उच्चतम न्यायालय ने MP व राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले Free की रेवडिय़ां बांटने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर दोनों राज्य की सरकारों से शुक्रवार को जवाब तलब किया। प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति JB. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़ी जनहित याचिका पर केंद्र, निर्वाचन आयोग तथा भारतीय रिजर्व बैंक को भी नोटिस जारी किए। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों राज्य की सरकारें मतदाताओं को प्रलोभन देने के लिए करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग कर रही हैं।इसके अलावा बिहार में हुई जाति गणना पर रोक लगाने से भी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा हैं। 
बिहार में जाति जनगणना मामले में सुनवाई अगले वर्ष
बिहार में जाति जनगणना मामले में दायर याचिका पर सुनवाई को supreme court  ने अगले वर्ष तक के लिए टाल दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2024 में होगी। Supreme Court में इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और इसवीएन भट्टी की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर विस्तृत सुनवाई करने की आवश्यकता है। खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल बिहार में जाति गणना के आंकड़े को प्रकाशित करने पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई जा रही है। खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट किसी भी राच्य सरकार को फैसला लेने से नहीं रोक सकती। यदि ऐसा होता है तो यह गलत होगा। अगर याचिकाकर्ता को जाति गणना के आंकड़ों पर किसी तरह की कोई आपत्ति है तो उस पर कोर्ट गौर करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम अब यह जांच करेंगे कि राज्य सरकार के पास जाति गणना के आंकड़ों को सार्वजनिक करने का हक है या नहीं। 
घोषणाओं की लगा दी है झड़ी
मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकार बचाने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने घोषणाओं की झड़ी लगा दी है। दोनों सरकारें रेवड़ी कल्चर को खूब बढ़ावा दे रही हैं। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में चुनाव के दौरान चुनावी घोषणाओं को 'रेवड़ी कल्चर या 'मुफ्त की रेवड़ी कहकर संबोधित करते हैं। इन दोनों राज्यों में free scheme से मतदाताओं को रिझाने की कोशिश की जा रही है।