विद्युत कर्मचारी संगठन जीत कर भी हार गए! तीन दिन चली लड़ाई लेकिन जांच नहीं हटा पाए, निलंबन हुआ बहाल और पदस्थापना बदल दी गई
विद्युत विभाग का कर्मचारी संगठन कर्मचारियेां की बहाली के लिए आर पार की लड़ाई लड़ रहा था। उनके पर लगे आरोप हटाने और निलंबन बहाली के लिए अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा था लेकिन तीन दिन में ही धरना समाप्त कर दिया गया। कर्मचारियों की बहाली कर तो दी गई लेकिन दाग नहीं हटाए गए। फिलहाल जांच जारी रहेगी। इतना ही नहीं पदस्थापना भी बद दी गई है। अब ऐसे में जीत किसकी हुई यह अनुमान लगाना मुश्किल है। सीई के आश्वासन के बाद कर्मचारी संगठनों ने अपने कदम पीछे खींच लिए और धरना समाप्त कर दिया है।

तीन दिन से पश्चिम संभाग कार्यालय के बाहर चल रहा था धरना प्रदर्शन
रीवा। ज्ञात हो कि मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी रीवा अंतर्गत पश्चिम संभाग में 10 मार्च को चोरी हुई थी। इस चोरी के मामले में कार्यपालन अभियंता ने चार कर्मचारियों पर कार्रवाई की थी। इनकी लापरवाही मानी गई थी। इसमें 3 रेग्युलर कर्मचारी और 1 आउटसोर्स कर्मचारी शामिल थे। रेग्युलर कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। वहीं आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई थी। इस कार्रवाई का मप्र विद्युत तकनीकी कर्मचारी संघ और विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने विरोध किया था। ज्ञापन सौंप कर कार्यपालन अभियंता से कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी। कार्यपालन अभियंता ने भी पहले आश्वासन दिया था। बाद में अपने बात से मुकर गए थे। इसी से नाराज कर्मचारी संगठनों ने पश्चिम संभाग कार्यालय के बाहर धरना पर बैठे गए थे। तीन दिनों से धरना प्रदर्शन जारी रहा। सोमवार को इस आंदोलन को खत्म कराने के लिए मुख्य अभियंता आईके त्रिपाठी सामने आए। आईके त्रिपाठी ने आंदोलनरत कर्मचारियों से मुलाकात की। सभी कर्मचारी संगठनों को आश्वासन दिया कि हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट जाएं। किसी पर कार्रवाई नहीं होगी। मार्च महीने में राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने में टीम लगी हुई है। इस पर निर्णय 5 अप्रैल को लिया जाएगा। सीई के आश्वासन के बाद विद्युत तकनीकी कर्मचारी संगठन और विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। वहीं दूसरी तरफ राहत के नाम पर जारी किया आदेश बहाली आदेश कर्मचारियों के गले की फांस बन गई है। सभी कर्मचारियों के निलंबन और सेवा समाप्त से बहाली का आदेश तो जारी किया गया है लेकिन उनकी पदस्थापना बदल दी गइ्र है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों की तीन दिन चली लड़ाई का ज्यादा अर्थ निकलता नहीं दिख रहा है। अब इस लड़ाई के बाद जीत किसकी हुई यह तय कर पाना मुश्किल है।
पूरी तरह से आरोप नहीं हटे हैं जांच के दायरे में फंसे रहेंगे
जिन तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। उन्हें कार्यपालन अभियंता ने आदेश जारी कर बहाल कर दिया है। उनकी पदस्थापना में जरूर परिवर्तन किया है। साथ ही आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बहाली तो कर दी गई है लेकिन जो आरोप लगाए गए हैं उनसे कर्मचारी मुक्त नहीं किए गए हैं। उनके खिलाफ जांच जारी रहेगी। बहाल किए गए कर्मचारियों में ललित कुमार शमा्र लाइन परिचारक को लौआ लक्ष्मणपुर वितरण केन्द्र से हिनौता, मोहन प्रसाद नामदेव को चोरहटा से लौआ लक्ष्मणपुर, शिवचरण विश्वकर्मा को हिनौता से सेमरिया में पदस्थ किया गया है। इसी तरह आउटसोर्स कर्मचारी अर्जुन पटेल की सेवा समाप्ति बहाल करते हुए भुसौल सब स्टेशन वितरण केन्द्र सेमरिया में पदस्थ करने का आदेश जारी किया गया है।