बिलाबांग में महंगी किताबें और स्कूल फीस बढ़ाने की हुई थी शिकायत, जांच में सही मिली अब गिरेगी गाज
बिलाबांग स्कूल पर गाज गिरनी तय है। जांच के बाद गड़बड़ी पकड़ी गई हैं। शिकायत के बाद कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए थे। बिलाबांग स्कूल का नाम भी उन 30 लिस्टों में शामिल था, जिनकी टीम ने जांच की है। जांच पूरी हो गई है। बिलाबांग में नियम विरुद्ध तरीके से 20 फीसदी तक फीस वृद्धि किए जाने और महंगी किताबों खरीदने की बात सामने आई है। कलेक्टर ने रिपोर्ट तलब की है। जांच टीम का प्रतिवेदन पहुंचने पर कार्रवाई तय है। हालांकि स्कूल प्रबंधन फिर से मामले को दबाने में जुट गया है।

बाल भारती स्कूल की भी हुई थी जबरन तय दुकान से किताब खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायत
जांच टीम ने डीईओ को सौंपी रिपोर्ट, कलेक्टर के पास भेजा जाएगा प्रतिवेदन
रीवा। ज्ञात हो कि 1 अप्रैल से प्राइवेट स्कूलों में भी नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। प्राइवेट स्कूलों में कक्षाओं के संचालन की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों की नींद भी उड़ जाती है। भारी भरकम फीस और पुस्तकों के बोझ तले दब जाते हैं। प्राइवेट स्कूल और दुकानदारों के बीच सांठगांठ के कारण हर साल अभिभावक लुटते हैं। प्रशासन ने पिछले सत्र से सख्ती बरती है। इसका असर हालांकि इस शैक्षणिक सत्र में नजर आया है। इसके बाद भी प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रहीं थी। कलेक्टर के पास प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ फीस वृद्धि से लेकर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों को लागू करने की शिकायतें पहुंची। इस पर कलेक्टर ने डीईओ को टीम बनाकर प्राइवेट स्कूलों की जांच के निर्देश दिए गए। डीईओ ने तीन टीमें बनाई और तीनों टीमों को 10-10 स्कूलों की जांच की जिम्मेदारी दी गई। तीन दिन में कलेक्टर ने स्कूलों के निरीक्षण की रिपोर्ट मांगी है। टीम ने दो दिनों में ही जांच पूरी कर ली है। अपना प्रतिवेदन भी डीईओ को सौंप दिया है। अब डीईओ जांच प्रतिवेदन बनाकर कलेक्टर के पास भेजेंगे। जिन स्कूलों में खामियां मिली हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
बिलाबांग स्कूल पर कार्रवाई तय
रीवा की सबसे महंगी स्कूलों में एक बिलाबांग है। यहां इसके बाद भी मनमानी तरीके से फीस बढ़ाई गई। अभिभावक ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की। कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए। टीम ने जब जांच की तो 20 फीसदी तक स्कूल फीस बढ़ाए जाने के प्रमाण मिले। सारे काम ऑफलाइन ही मिले। आनलाइन कहीं भी स्कूल प्रबंधन ने जानकारी फीड नहीं कराई थी। इसके अलावा महंगी किताबों की शिकायत भी सही पाई गई है। कलेक्टर को इसकी जानकारी दी गई। कलेक्टर ने डीईओ ने प्रतिवेदन मांगा है। बिलाबांग पिछले साल राजनीतिक दबाव बनाकर कार्रवाई से बच गया था लेकिन इस मर्तबा कलेक्टर कार्रवाई करने की तैयारी में है। हालांकि इस बार भी बिलाबांग स्कूल प्रबंधन दबाव बनाने में जुटा हुआ है।
इन स्कूलों की कराई गई है जांच
डीईओ ने तीन टीम बनाई है। एक टीम में सहायक संचालक आकांक्ष सोनी, सीएम राइज प्राचार्य वरुणेन्द्र प्रताप ङ्क्षसह, एसके स्कूल प्राचार्य मिथिलेश गहरवार, एएसओ संगीता त्रिपाठी शामिल हैं। इन्हें फ्रोमेंस स्कूल, बीएनपी स्कूल, इंट्रिगिटी स्कूल, भास्कर स्कूल, वेदांता पब्लिक स्कूल चिरहुला, लक्ष्य एकेडमी चिरहुला, इंडियन पब्लिक स्कूल, टेंडर हार्ट इंटरनेशनल स्कूल गंगापुर, विंध्या पब्लिक स्कूल अनंतपुर और हावर्ड इंटर नेशनल स्कूल रीवा के जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी तरह दूसरी टीम में सहायक संचालक राजेश मिश्रा, योजना अधिकारी अखिलेश मिश्रा, बदरांव प्राचार्य आरके जैन, रामपुर गंगेव प्राचार्य गिरीश मिश्रा शामिल हैं। इन्हें गीतांजलि पब्लिक स्कूल सिविल लाइन, सेंट्रल एकेडमी, बाल भारती स्कूल, ज्ञानस्थली, राजहंश, गीता ज्योति, ज्योति उमावि समान, सांई पब्लिक स्कूल, रीवा इंटरनेशनल स्कूल समान, रेवांचल पब्लिक स्कूल यूनिवर्सिटी रोड की जांच करनी थी। इसी तरह तीसरी टीम में नवीन श्रीवास्तव एडीपीसी रमसा, देवराज सिंह प्राचार्य हर्दी शंकर, भोलगढ़ प्रार्चा वीरेन्द्र शुक्ला, खजुहा प्राचार्य शरदचंद्र त्रिपाठी को शामिल किया गया। इन्हें सेक्रेड हार्ट पडऱा, गुरुकुल उमावि खैरा चोरहटा, बिलाबांग उमावि खैरा चोरहटा, दिल्ली पब्लिक स्कूल अटरिया, किड्स वल्र्ड रमकुईं, किड्स वर्ड झिरिया, नंदन किड्स अनंतपुर, चिल्ड्रन एकेडमी अनंतपुर, द ब्रेन शेपर्स स्कूल शारदापुरम, सेंट मैरी उमावि अनंतपुर की जांच करनी थी। टीम ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है।
बालभारती पर भी अभिभावकों ने लगाए आरोप
सूत्रों की मानें तो सिरमौर चौराहा में संचालित बाल भारती स्कूल के खिलाफ भी कलेक्टर के पास शिकायत पहुंची थी। शिकायत में स्कूल प्रबंधन पर तय दुकान से ही पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य किए जाने का आरोप लगाया गया था। कलेक्टर के निर्देश पर टीम ने पहुंच कर जांच की। हालांकि स्कूल प्रबंधन जांच के दौरान प्राइवेट और महंगी प्रकाशकों की किताबों को लेने की अनिवार्यता से मुकर गया। उन्होंने बताया कि यह वैकल्पिक है। जिसे लेना है वह ले सकता है। वहीं स्कूल प्रबंधन की फीस से लेकर अन्य चीजों की भी जांच की गई। इसी तरह की शिकायत ज्ञान स्थली स्कूल की भी हुई थी। यहां भी टीम ने पहुंच कर जांच की।